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जून, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

धन्य हुआ है जिनसे भारत

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प्रस्तुत है मेरी यह कविता जो समर्पित है उनको जिसने ये भारत और ये धरती धन्य हुई है धन्य हुआ है जिनसे भारत  कविता   -  शब्द पुष्प है अर्पित करके नमन उन्हें ये कलम है करती  धन्य हुआ है जिनसे भारत धन्य हुई है जिनसे धरती  महाराणा की प्रतिज्ञा की  छत्रपति के अभिमान की आल्हा ऊदल गोरा बादल तन मन हिंदोस्तान की  जय जयकार करे हिमालय गंगा यमुना हाथ जोड़ती  धन्य हुआ है जिनसे भारत धन्य हुई है ये धरती पुण्यश्लोक के सम्मुख आकर  घुटने टेके मुगलों ने भी  लक्ष्मी बन झलकारी आई दुर्गा रूप बनाकर लक्ष्मी  रण में अरि की रूह कांपती जैसे ही हुंकार है भरती धन्य हुआ है जिनसे भारत धन्य हुई है ये धरती शौर्य का प्रतिमान गड़ गए रक्त से इतिहास लिख गए  वीर तात्या बड़े साहसी  एक अकेले सौ से भिड़ गए अंगार धधकते सीने में आग निकलती पसीने में चाहे शीश कटे कट जाय मंगल नहीं छुएगा चरबी धन्य हुआ है जिनसे भारत  धन्य हुई है ये धरती  चूम के फांसी भगत सिंह ने  दिखलाया भारत का साहस आज़ाद बिस्मिल ऊदम सिंह रणधीर को  बारंबार नमन है ऐसे क्रां...

रूही और जूही 🐦

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पिछले कुछ महीने पहले एक गौरैया चिड़िया अपना घोंसला बनाने के लिए तिनके इकट्ठा कर रही थी और हमारे घर के एक कोने में उसने कुछ तिनके इकट्ठे करके रखे, लेकिन दिवाली के समय घर की सफाई हुई तो वो तिनके भी वहां से फेंक दिए गए मुझे ये सब बहुत ही बेकार लगा वो बिचारी चिड़िया एक-एक तिनका दूर-दूर से तिनका-तिनका बीन कर घोंसला बनाने की तैयारी कर रही है और यहां एक पल में उसकी सारी मेहनत पर झाड़ू फेर दिया। फिर मैंने ये बात पापा को बताई तो उनने उन सारे तिनकों को इकट्ठा करके एक पुराने टूटे डिब्बे में रख कर उसी जगह टांग दिया जिससे दोनों काम हो सके एक तो चिड़िया का घोंसला कायम रहे और दूसरा नीचे गिरने वाले तिनकों के कारण सफाई व्यवस्था भी भंग न हो।  फिर कुछ दिन बाद उस चिड़िया ने उसमे अंडे दिए और वो गौरैया रोज सुबह-शाम ची-ची-ची करती हुई अपने घोंसले में आती और अपने अंडों को निहारती। सुबह सुबह उसकी मधुर ची ची ची की ध्वनि से दिन की शुरुआत होती और इसी ची ची ची के साथ कब शाम हो जाती पता ही नहीं चलता। हमारे गांव में लाइट बहुत जाती है जब भी दिन में लाइट जाती तो ये अपना ची ची ची वाला गाना गाके हमारा मन मोह लेती थी।...

यात्रा संस्मरण

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यात्रा संस्मरण रानीघाटी:कुछ नया मिला,कुछ नया देखा हिंदी साहित्य सभा में आज बैठक में ग्वालियर के सभी युवा साहित्यकारों के साथ मुझे कुछ नया सीखने को मिलेगा इसीलिए मैंने जाने का मन बना लिया, और साइकिल उठाकर चल दिया। हिंदी साहित्य सभा की पहली बैठक में मैं आज उपस्थित होने जा रहा था और मुझे ये भी नहीं पता था कि इस बैठक का उद्देश्य क्या है। मैं सभा में पहुंचा बहुत सारी साहित्यिक बातें हुई लेकिन सबसे अच्छी बात सामने ये आई कि हिंदी साहित्य सभा युवा साहित्यकारों को साहित्यिक यात्रा पर जाने का मौका देगी और उसके साथ-साथ नवीन कलाकारों को युवा सम्मेलन में भाग लेने का मौका भी मिलेगा, मेरे लिए ये दोनों ही महत्वपूर्ण थी क्योंकि मुझे घूमना बहुत पसंद है और साहित्य के साथ यात्रा तो सोने पर सुहागा होगा बहुत मस्ती करेंगे और दूसरी बात युवा सम्मेलन की तो यहां भी संगीत कविता गीत की बात आती है तो वहां मेरा मन अटका ही रहता है। मैं बहुत उत्साहित था इस साहित्यिक यात्रा के लिए, मैं यही सोच रहा था कि ये यात्रा जितनी जल्दी हो उतना ही अच्छा होगा तभी मैडम ने कहा कि हम इसी रविवार को यात्रा पर जाने वाले है घाटीगांव में ए...

खुद पर गर्वित होंगे हम भी इक दिन चर्चित होंगे हम भी

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जब हम लगातार पराजय का सामना कर रहे होते हैं तब कभी कभी हम खुद पर विश्वास करना कम कर देते है लेकिन हम यह नहीं समझ पाते कि अगर हमें कच्ची अमिया खाने को मिल जाएगी तो फिर हम पके रसीले आम के स्वाद से वंचित हो सकते है, बस यही बात हमें अपने जीवन में उतारनी चाहिए कि अगर यहां पर हम जीत गए और जीत कर घर बैठ जाएंगे तो जो एक बडी जीत हमारा इंतज़ार कर रही है वो किसी और को मिल जाएगी इसलिए किसी भी चीज में अगर पराजय मिलती है तो हमें हताश होने के स्थान पर एक नए अध्ययन की शुरुआत करनी चाहिए। एक नया विश्वास मन में भरना चाहिए। इस बात का सबसे बडा उदाहरण है APJ अब्दुल कलाम जी अगर कलाम जी एयरफोर्स में नौकरी लेकर रह जाते तो आज देश को मिशाइलमैन नहीं मिल पाता। तो अब पराजय मिलती है तो हताश न होकर खुद पर विश्वास गड़ना है कि इससे बड़ी जीत हमारा इंतज़ार कर रही है इसी परिपेक्ष में मेरे द्वारा लिखा एक गीत यहां मैं आपके साथ साझा कर रहा हूं। पढ़िए आनन्द लीजिए - गीत - खुद पर गर्वित होंगे हम भी इक दिन चर्चित होंगे हम भी  स्वप्न जो आज आंखों में है गहन उदासी रातों में है  कितनी बार मरेगा साहस  हँस कर...

Birthday 🎉

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"न जाने कौन से गुण पर दयानिधि रीझ जाते हैं यही सद् ग्रंथ कहते हैं यही हरि भक्त गाते हैं" शायद इतनी खुशी मुझे मेरे जन्मदिवस पर ना हुई होगी जितनी कि कल आदरणीय बाबूजी के द्वारा जन्मदिन की शुभकामनाएं पाकर हुई।  वैसे मेरा जन्मदिन 21 अप्रैल को होता है लेकिन फेसबुक पर शुरुआत से ही 30 मई लिखा हुआ था मैंने कभी गौर नहीं किया और इतना ज्यादा ध्यान उस पर नहीं गया मेरा तो कभी एडिट भी नहीं कर पाया मैं, लेकिन कल बाबूजी का कॉल आता है और जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हैं तब बताने पर बाबूजी बड़े ही प्रसन्न भाव से समझाते हुए कहते हैं कि "अगर कोई भी कार्य कर रहे हो तो पूरी जिम्मेदारी से किया करो अगर गलती हुई है तो उसे सुधारा भी करो, मैंने तुम्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं देने के लिए कॉल किया है और मैंने जन्मदिन का पोस्टर भी बनवा लिया है अब उसमें एडिट कर 21 अप्रैल में कर देता हूं तो अगली साल के लिए वह हो जाएगा" बाबूजी का कॉल करना शुभकामनाएं देना मुझसे इतने सहज रूप से बात करना मुझ जैसे छोटे बच्चे के लिए बहुत बड़ी बात है। बड़ी बात यह नहीं है कि उन्होंने मुझे शुभकामनाएं दी है  बड़ी बात यह है कि ...