धन्य हुआ है जिनसे भारत
प्रस्तुत है मेरी यह कविता जो समर्पित है उनको जिसने ये भारत और ये धरती धन्य हुई है धन्य हुआ है जिनसे भारत कविता - शब्द पुष्प है अर्पित करके नमन उन्हें ये कलम है करती धन्य हुआ है जिनसे भारत धन्य हुई है जिनसे धरती महाराणा की प्रतिज्ञा की छत्रपति के अभिमान की आल्हा ऊदल गोरा बादल तन मन हिंदोस्तान की जय जयकार करे हिमालय गंगा यमुना हाथ जोड़ती धन्य हुआ है जिनसे भारत धन्य हुई है ये धरती पुण्यश्लोक के सम्मुख आकर घुटने टेके मुगलों ने भी लक्ष्मी बन झलकारी आई दुर्गा रूप बनाकर लक्ष्मी रण में अरि की रूह कांपती जैसे ही हुंकार है भरती धन्य हुआ है जिनसे भारत धन्य हुई है ये धरती शौर्य का प्रतिमान गड़ गए रक्त से इतिहास लिख गए वीर तात्या बड़े साहसी एक अकेले सौ से भिड़ गए अंगार धधकते सीने में आग निकलती पसीने में चाहे शीश कटे कट जाय मंगल नहीं छुएगा चरबी धन्य हुआ है जिनसे भारत धन्य हुई है ये धरती चूम के फांसी भगत सिंह ने दिखलाया भारत का साहस आज़ाद बिस्मिल ऊदम सिंह रणधीर को बारंबार नमन है ऐसे क्रां...