रूही और जूही 🐦

पिछले कुछ महीने पहले एक गौरैया चिड़िया अपना घोंसला बनाने के लिए तिनके इकट्ठा कर रही थी और हमारे घर के एक कोने में उसने कुछ तिनके इकट्ठे करके रखे, लेकिन दिवाली के समय घर की सफाई हुई तो वो तिनके भी वहां से फेंक दिए गए मुझे ये सब बहुत ही बेकार लगा वो बिचारी चिड़िया एक-एक तिनका दूर-दूर से तिनका-तिनका बीन कर घोंसला बनाने की तैयारी कर रही है और यहां एक पल में उसकी सारी मेहनत पर झाड़ू फेर दिया। फिर मैंने ये बात पापा को बताई तो उनने उन सारे तिनकों को इकट्ठा करके एक पुराने टूटे डिब्बे में रख कर उसी जगह टांग दिया जिससे दोनों काम हो सके एक तो चिड़िया का घोंसला कायम रहे और दूसरा नीचे गिरने वाले तिनकों के कारण सफाई व्यवस्था भी भंग न हो। 
फिर कुछ दिन बाद उस चिड़िया ने उसमे अंडे दिए और वो गौरैया रोज सुबह-शाम ची-ची-ची करती हुई अपने घोंसले में आती और अपने अंडों को निहारती। सुबह सुबह उसकी मधुर ची ची ची की ध्वनि से दिन की शुरुआत होती और इसी ची ची ची के साथ कब शाम हो जाती पता ही नहीं चलता। हमारे गांव में लाइट बहुत जाती है जब भी दिन में लाइट जाती तो ये अपना ची ची ची वाला गाना गाके हमारा मन मोह लेती थी। अभी लगभग 10 दिन पहले ही उन अंडों से दो छोटे छोटे बच्चे निकले जो दिन रात सुबह शाम बस चिल्लाते ही रहते थे। मेरा मन बहुत करता कि कभी वो घोंसले से बाहर निकल कर हमें भी अपने दर्शन दें।
चिड़िया उनको दाना चुगाने के लिए आती और वो ची ची ची करके उसका स्वागत करते। पहले तो चिड़िया अकेली ही थी वो भी कम ही आती थी तो कम ची ची ची होती थी लेकिन अब तो वो हर 10 मिनट में आती है और अब तो वो तीन हो गए है अब तो पूरे दिन पूरे घर में ची ची ची गूंजता रहता है। 
वो दोनों बच्चे आखिर कब तक एक छोटे से घोंसले में डले रहेंगे उनका भी मन करता होगा की घोंसले के बाहर की दुनियां देखी जाए, तो बस वो आ गए एक दिन बाहर पहले एक नीचे गिरा तो मम्मी ने देखा और उसे पकड़ लिया कहीं वो बाहर रोड़ पर न निकल जाए। उस चिड़िया को जब भी हम घोसले में वापस रखते वह फिर से नीचे आ जाती और शायद उसे यही पसंद था वह बार-बार नीचे आकर यह कहना चाहती थी कि मुझे घोसले में नहीं रहना है मुझे दुनिया देखनी है मुझे दुनिया में इधर उधर घूमना है पूरे घर में वह पूरे दिन इधर से उधर घूमती रहती थी उसे किसी का नहीं डर भी नहीं था इसी के चलते हमने पूरे घर को पूरी तरीके से बंद कर दिया गेट खिड़की दरवाजे सब बंद कर दिए ताकि वह चिड़िया बाहर ना निकल पाए क्योंकि अगर वह बाहर रोड पर गई तो कुत्ते बिल्ली कोई भी उसे खा सकता है। एक चिड़िया नीचे आई तो दूसरी भी आई। दोनों चिड़िया हमारे घर में नए मेहमान की तरह हमारे साथ रहने लगी जब हम लोग उन्हें हथेली पर लेते तो चुपचाप आ भी जाती और हम लोगों को देखती हम लोग टीवी चलाते थे तो वह टीवी भी देखती थी वे किसी से डरती नहीं थी। 
बड़ी चिड़िया आकर उन्हें दाना खिलाती थी और खिलाकर फिर से चली जाती थी बड़ी चिड़िया को देखकर वह दोनों चिल्लाती हुई उसके पास जाती थी और दाना चुनकर उसी के साथ उड़ना भी चाहती थी लेकिन अभी छोटी थी तो उड़ना नहीं जानती थी वह दोनों छोटी छोटी चिड़िया इतनी प्यारी लगती थी कि लगता था कि बस उन्हें देखते ही रहो हम लोग जब भी उन्हें उनके साथ खेलते थे तो वह इधर उधर भागती थी लेकिन एक बार बड़ी चिड़िया ने उन्हें खटिया के अजवान पर बैठा दिया तो पूरे दिन उसी अजवान पर बैठी रही और पूरे घर को देखती रही इससे पता चलता है कि वह हमारी बात नहीं मानना चाहती थी वह अपनी मम्मी की बात मानना चाहती थी। 
पहले दिन वह पूरे घर में इधर से उधर घूमती रही और दूसरे दिन वह थोड़ा-थोड़ा उड़ना सीख रही थी इधर से उधर तक छलांग लगाना उन्हें उनकी बड़ी चिड़िया सिखा रही थी पहले बड़ी चिड़िया एक जगह से दूसरी जगह छलांग मारती थी फिर उसी को देखकर वह दोनों भी उड़ती थी यह दृश्य बड़ा ही मनमोहक था वह धीरे-धीरे फुदक फुदक कर बाहर भी निकल जाती थी तो उन्हें रोड पर पकड़ने भी जाना पड़ता था और डर यह लगता था कि कहीं कोई ले ना जाए।
 जब फुदकने की क्लास उनकी चल रही थी तभी उनके नामकरण की मन में सूझी और उनका नाम रखा रूही और जूही, एक चिड़िया थोड़ी सी बड़ी थी उसका नाम रुही रखा एक उस से छोटी थी उसका नाम जूही रखा यह अभी लगभग 10 से 12 दिन के उम्र की थी और फुदकना सीख रही थी उड़ना बिल्कुल भी नहीं जानती थी लेकिन थोड़े थोड़े पंख फैलाना जानती थी अगर घोसले में बैठा दो तो नीचे उड़ कर आ जाती थी लगातार एक-दो दिन ऐसे ही फुदकते हो गए तो रूही बाहर निकल गई और वह उड़ भी गई अब यह मुझे नहीं पता कि वह कहां तक उड़ी कहां जाकर ठहरी वह अपनी मां बड़ी चिड़िया के साथ चली गई फिर वापस कभी नहीं आई रूही के चले जाने से मैंने सोचा कि शायद उड़ना सीख गई होगी इसलिए चली गई इसका मतलब कि अगर जूही भी उड़ना सीख गई तो यह भी चली जाएगी यह हमेशा के लिए नहीं रहने वाली है अगले दिन जूही भी थोड़ा-थोड़ा उड़ना सीख रही थी फिर देखते ही देखते जूही भी आकाश में उड़ाने भरने लगी। जब जूही उड़ कर गई तो घर में सिर्फ सन्नाटा छा गया उनके जाने से घर में सूना सूना सा लगने लगा जिस खाट की अजमान पर वह बैठती थी उन्हें देखकर लगता था कि वापस कभी आए, मोबाइल में बहुत सारे फोटो थे उन्हें देख देख कर मन बहुत प्रसन्न होता था 
कुछ 10-15 दिन बाद वह चिड़िया फिर से घर में आई, रूही जब पहले दिन घर में इधर-उधर घूम रही थी तब एक दिन मम्मी महावर लगा रही थी उस महावर की कटोरी में वह कूद गई तो मम्मी ने उसे पूरा ही महावर से रंग दिया वह थोड़ी-थोड़ी लाल गुलाबी गोरिया लगने लगी जब 10-15 दिन बाद रूही लौट कर आई तो उसके पैर गुलाबी थे कुछ-कुछ थोड़े-थोड़े पंख गुलाबी रंग के थे तो हम समझ गए कि वह हमारी पुरानी वाली रूही है वही घोसले में बैठकर हम सबको देख रही थी शायद वह अपने बचपन को सोच रही होगी मुझे लगा कि वह डरेगी नहीं लेकिन जैसे ही मैं उसके पास गया वह फिर से उड़ गई।
- अजबान पर बैठी रूही और जूही 🐦

- निडर भाव से मेरे हाथ पर बैठी

ये वीडियो रूही और जूही के लिए <youtube>

- विकास बघेल 

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