तुझको पुकारे राधा कान्हा

नैन तरस गए आजा कान्हा, 
तुझको पुकारे राधा कान्हा।
सपनों में जो तान सुनाई,
मुरली मधुर बजा जा कान्हा।।
 
वृंदावन के बंदर रूठे,
बरसाने में मोर नहीं है।
जब से छोड़ गए तुम कान्हा,
ब्रज में माखन चोर नहीं है।।
सूना पनघट सूनी यमुना,
अनबन निधिवन तनमन सूना।
सूनापन है घर आंगन में,
ब्रज का कोना कोना सूना।।
अधरों पर ले नाम तुम्हारा,
तिल तिल रोए राधा कान्हा।
नैन तरस गए आजा कान्हा,
तुझको पुकारे राधा कान्हा।।


फूलों ने खुशबू है छोडी,
कांटो ने छोड़ा है चुभना।
ढोर बछेरू रूठ गए सब,
गईयो ने छोड़ा है चरना।।
सूख गए सांवन के बादल,
कुम्हलाई मधुबन की कलियां।।
याद तुम्हीं को करते करते,
रो रो कहती हैं सब सखियां।
आजा गगरी लेकर ठांडी,
आजा फिर से सता जा कान्हा।।
नैनी तरस गए आजा कान्हा,
तुझको पुकारे राधा कान्हा।।
 


रस्ता रस्ता तुझको देखूं,
मंदिर मंदिर तुझको मांगू।
जग की सारी खुशियां दे दूं,
ये मन यौवन जीवन वारूं।।
आंखों का काजल ये पूछे,
मेरी पागल पायल पूछे।
किस विधि प्रेम बताया तुमने,
किस विधि प्रेम निभाया तुमने।।
तेरी राधा रानी बुलावे,
आजा मेरे राजा कान्हा।
नैन तरस गए आजा कान्हा,
तुझको पुकारे राधा कान्हा।।


दूध दही से घी माखन से,
आजा तुझको रिझाना चाहें।
एक झलक बस दर्शन दे दे,
एक झलक को पाना चाहें।।
भाग्य विधाता कहने वाला, 
भाग्य के बल पर छोड़ गया है।
जन्मों का नाता कहता था,
आज उसी को तोड़ गया है
प्रीत की रीत निभा जा कान्हा
ओ मनमीत तू आजा कान्हा
नैन तरस गए आजा कान्हा
तुझको पुकारे राधा कान्हा ।।

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