तुम जो चली गई हो

कभी जो गीत गाए किसी ने आंख से अश्रु बहाए हो 
कभी जो गीत गाए किसी ने अपनी विरह बताई हो 
उन्ही गीत को फिर से तुम दोहरा गई हो 
तुम जो चली गई हो तुम जो चली गई हो 

ये दिल तो अकेला हो गया है मन ही मन ये रो रहा है 
बात किसी से करता नही ये कैसा पागल हो गया है 
हमारी तो आदत पुरानी है रोने और गाने की 
यही राग इस जीवन की क्या यही रीत है जमाने की 

इस बार भी मुझे मारकर फिर से तुम जी गई हो 
तुम जो चली गई हो तुम जो चली गई हो 

सुनो क्या क्या हुआ है बाद तुम्हारे जाने के 
इक वीराना छा गया है बाद तुम्हारे जाने के 
हवा के झोंके इधर कभी भी आए नही है उस दिन से 
मैं कल तक चुप था मगर लफ्ज़ रुकते नहीं है इस मन से 

बाद तुम्हारे जाने के मानो इच्छाएं सारी मार ही गई हो 
तुम जो चली गई हो तुम जो चली गई हो

मेरे इस जीवन की इकलौती कमाई तुम ही हो 
मेरे इस बंजर दिल में प्रेम की जाई तुम ही हो 
गीत तुम्हारे शोक में मैं भर भर आंसू गाता हूं
मेरे दिल से तेरे दिल तक विरह वेदना सुनता हूं

मेरी तड़प तो बिन पानी के तड़प कोई मछली गई हो 
तुम जो चली गई हो तुम जो चली गई हो 

नैन हमारे बस तुमको ही देखा करते रहते है 
दरस तुम्हारे हमको तो बस यूंही मिलते रहते है 
आस तुम्हारे आने की हम तो लगाए बैठे है 
फकत तुम्हारे वास्ते हम नैन बिछाए बैठे है 

आग ऐसी लगाई जिसमे रूह जल ही गई हो 
तुम जो चली गई हो तुम जो चली गई हो
- Poet Vikas Baghel 

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