देवी पुण्यश्लोक
उज्ज्वल गाथा का तेज प्रखर रहे
राजमाता लोकमाता का घहर रहे
शस्त्र और शास्त्र दोनों एक साथ
देवी पुण्य श्लोक तू अमर रहे
तू अमर राग तू प्रचण्ड ज्वार
तुझसे ही उज्जवल है मल्हार
तूने विपदाओं को गले लगाया
तूने धैर्य को भी धैर्य सिखाया
मालवा के कष्टों को हरा है तूने
संघर्ष सदा ही चुना है तूने
षड्यंत्रों में रहकर कितना कष्ट पाया है
पति ससुर पुत्र कितना कुछ गवाया है
फिर भी षड्यंत्र सारे बेअसर रहे
देवी पुण्यश्लोक तू अमर रहे
इंदौर से लेकर मथुरा काशी तक
सोमनाथ विश्वनाथ गंगा घाटी तक
मुगलों से खंडित हुए नगर बसाए
तलवार उठी तो जन प्राण बचाए
मराठा साम्राज्य की शान तुझी से है
माहिष्मति का गौरव गान तुझी से है
आताताइयों का वो दौर रहा
मुगल अत्याचारों के समर रहे
फिर भी सफल शासिका कहलाई
देवी पुण्य श्लोक तू अमर रहे
कुछ ऐसे नारी शक्ति को सम्मान दिया
युद्ध क्षेत्र में नारी सेना का निर्माण किया
विद्या ज्ञान विज्ञान में विदुषी
नीति न्याय धर्म एकता की प्रतिमूर्ति
दयालुता की पर्याय कोमल हृदय
तेज तर्रार कि जैसी शौर्य का परिचय
शौर्य कि जिससे रण में बैरी कांपे
एक पत्र में पेशवा उल्टे पांव भागे
कुछ ऐसे नारी शक्ति को सम्मान दिया
युद्ध क्षेत्र में नारी सेना का निर्माण किया
और हाथों में सदा शिव शंकर रहे
देवी पुण्य श्लोक तू अमर रहे
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