मुफलिसी की बाजारों से क्या दोस्ती

मुफलिसी की बजारों से क्या दोस्ती
इन गुलाबों की कांटों से क्या दोस्ती

दौलतों शोहरतों से न बांधों हमें 
हम फकीरों की महलों से क्या दोस्ती

उस परी ने हमें खूब चाहा मगर
एक शायर की परियों से क्या दोस्ती
 
देख लो सोच लो जान लो तुम हमें 
वादे झूठे है वादों से क्या दोस्ती
 
गम को हस हस गले से लगाते हैं हम  
इश्क वालों की खुशियों से क्या दोस्ती 

गांव गलियां शहर घर को भूलो भी तुम 
तुम दीवानों की शहरों से क्या दोस्ती

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