Meri Maa - Ghazal
समस्त मातृशक्ति को सादर समर्पित ये ग़ज़ल -
द्वेष भरा है जग ये सारा प्रेम की सूरत मेरी माँ
हाथ वो गर रख दे सिर पर तो बदले किस्मत मेरी माँ
पल्लू में बांध के बैठी है ब्रह्माण्ड की ताकत मेरी मां
इससे ज्यादा क्या हम मांगें इससे बढ़कर क्या चाहें
अपनी दौलत अपनी शोहरत अपनी जरूरत मेरी माँ
उसके आगे बौना अम्बर उसके आगे फीका सुरज
सबसे पहले उसको पूजूं रब की मूरत मेरी माँ
चाहे दुनियां चाहे हमको चाहे हमको ठुकुराए
मेरी चाहत मेरी उल्फत मेरी मुहब्बत मेरी माँ
पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण कोना कोना जाकर देखो
कोरा भ्रम है ये जग सारा सिर्फ हकीकत मेरी मां
- Poet Vikas Baghel
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