हम दोनों है देखो कितने पास प्रिये

कितना दूर है चांद से उसका चकोर प्रिये
और दूर है रात से कितनी भोर प्रिये
कितना दूर है धरती से आकाश प्रिय
हम दोनों हैं देखो कितने पास प्रिय

कम से कम ज्यादा से ज्यादा का दुःख याद करो
अंतर्मन के हर कष्ट हर बाधा का दुःख याद करो
प्रेम प्रतीक्षा की पावन मर्यादा का दुःख याद करो
बने द्वारकाधीश कृष्ण पर राधा का दुःख याद करो

राधा से कान्हा की दूरी है केवल आभास प्रिये
हम दोनों हैं देखो कितने पास प्रिय

ये तो भ्रम है जो मांगो वो मिल जाए
ये तो भ्रम है पास रहकर प्रेम किया जाए
सारे भ्रम पल में चकनाचूर हुए
जिस पल वैदेही से रघुवर दूर हुए

ये दूरी है पल दो पल का वनवास प्रिय
हम दोनों हैं देखो कितने पास प्रिय

प्रेम ने झेली है वर्षों से कितनी ही दूरी सुनो 
कितनी आई विपदा और कितनी ही मजबूरी सुनो 
फिर भी सावन के झूलों ने गीत वही दोहराए है 
आस जगाए रखी मन ने और अधर मुस्काए है 

कितना दूर है पतझड़ से मधुमास प्रिय
हम दोनों हैं देखो कितने पास प्रिय


सुनिए इस गीत को यूट्यूब पर - कलमकार https://youtu.be/e0GgO2EkTOU



टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

तुम जो चली गई हो