मेरी माँ, ग़ज़ल - कवि विकास बघेल


मेरी माँ गजल मेरे द्वारा लिखी गई मेरी बहुत पसंदीदा है। यह गजल मैंने 14 मई 2023 यानी मातृ दिवस के अवसर पर लिखी थी। आप भी पढ़िए मेरी यह गजल, और जाकर सुनाइए अपनी माँ को - आपका विकास बघेल 




ग़ज़ल-

सारी दुनिया धूप घनी है छांव की राहत मेरी माँ

द्वेष भरा है जग ये सारा प्रेम की सूरत मेरी माँ।


हाथ वो गर रख दे सिर पर तो बदले किस्मत मेरी माँ

पल्लू में बांध के बैठी है ब्रह्माण्ड की ताकत मेरी मां।


इससे ज्यादा क्या हम मांगें इससे बढ़कर क्या चाहें

अपनी दौलत अपनी शोहरत अपनी जरूरत मेरी माँ।


उसके आगे बौना अम्बर उसके आगे फीका सुरज 

सबसे पहले उसको पूजूं रब की मूरत मेरी माँ ।


चाहे दुनियां चाहे हमको चाहे हमको ठुकुराए

मेरी चाहत मेरी उल्फत मेरी मुहब्बत मेरी माँ


#vikasbaghel #kavivikasbaghel #poetvikasbaghel #gwaliorpoet 



टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

तुम जो चली गई हो